सिख इतिहास और संस्कृति के रक्षक 'निहंग सिंह': जानें कौन हैं नीले चोले और शस्त्रों से सजे ये पूर्ण योद्धा

सिख इतिहास और संस्कृति के रक्षक 'निहंग सिंह': जानें कौन हैं नीले चोले और शस्त्रों से सजे ये पूर्ण योद्धा

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'Nihang Singhs' – Guardians of Sikh History and Culture

देहरादून। 'Nihang Singhs' – Guardians of Sikh History and Culture, पिछले 15 दिनों में उत्तराखंड के कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग और देहरादून में निहंगों से जुड़े तीन बड़े घटनाक्रम हुए। जिसके बाद लोगों के मन ये यह जिज्ञासा पैदा हो गई है कि निहंग कौन होते हैं?

सिखों के 10वें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह ने मुगलों से लड़ने के लिए निहंग सिंहों का दस्ता बनाया था। जिन्हें आदेश दिया गया था कि हर समय तैयार रहें। निहंग शब्द का अर्थ है, 'दर्द और आराम से अप्रभावित। ध्यान, तपस्या और दान के लिए दिया गया' और 'पूर्ण योद्धा'।

सिख इतिहासकार बताते हैं कि पहले सिख शासन (1710-15) के पतन के बाद मुगल शासक सिखों को खत्म कर रहे थे। वहीं दूसरी ओर अफगान हमलावर अहमद शाह दुर्रानी (1748-65) हमले कर रहा था। तब सिख पंथ की रक्षा करने में निहंगों ने प्रमुख भूमिका निभाई थी। खालसाई सेना को पांच बटालियनों में बांटा गया गया था। जिसमें निहंग भी शामिल थे।

खास पहनावा इनकी पहचान

नीला चोला इनकी पहचान है। वह हमेशा एक खास पहनावे में रहा करते हैं। सिर पर नीले रंग का दुमाला (गोल पगड़ी) पहनते हैं, जिस पर लोहे का कड़ा भी लगाया जाता है। भाला और तलवार इनके प्रमुख हथियार हैं।

यह आम लोगों की तरह जीवन निर्वाह नहीं करते। ये छावनी बनाकर रहते हैं। वहीं पर गुरुद्वारा साहिब भी बना लेते हैं। निहंग अक्सर घोड़ों पर ही सवार होकर चलते हैं।

हैरतअंगेज करतब

उत्तराखंड में लगने वाले मेलों और बैसाखी पर निहंग अपने करतब दिखाते हैं। देहरादून के झंडा साहिब मेले में भी निगंह हैरतअंगेज करतब दिखाते हैं।

 

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